बरेली. में अपने पति के इलाज के खातिर एक महिला ने अपने 15 दिन के बेटे को किया अपने से जुदा 42 हजार रुपए में बेच दिया अपना बेट। पड़ोसियों को जब बच्चा नहीं दिखा, तो बच्चे माँ दंपती से उसके बारे में पूछा, तब ये सच्चाई सामने आई। मामला हाफिजगंज के गांव ढकिया का है। बेचते नहीं तो क्या करते…

– मजदूरी करने वाले हरस्वरूप मौर्य ने कहा- “बच्चे को बेचते नहीं तो क्या करते। हमारे पास कोई और दूसरा चारा नहीं था। इलाज नहीं हो सका, अब पैरों ने काम करना बंद कर दिया है। नौकरी करने के लायक नहीं बचा हूं में ।

‘राशन कार्ड नहीं है हमारे पास’
– हरस्वरूप ने बताया, “उसके पास जमीन नहीं है। राशन कार्ड भी नहीं बना है। दो साल पहले गांव में जमीन के पट्टे हुए, उसने कोशिश की। पट्टा आवंटन की लिस्ट में उसका नाम नहीं आया। उसने बताया कि उसके पास राशन कार्ड भी नहीं है जिस से वो अपने घर का काम चला कैसे ।

9 अक्टूबर को हुआ था हादसा
– 9 अक्टूबर को काम करते वक्त खटीमा में निर्माणाधीन मकान की दीवार का एक हिस्सा हरस्वरूप मौर्य के ऊपर गिर गया, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गया।
– इस घटना के बाद से कमर के नीचे का हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। पैसों की कमी की वजह से इलाज ठीक से नहीं हो सका। घर में अकेले कमाने वाले हरस्वरूप के बीमार होने से घरवालों के सामने पैसे की परेशानी आने लगी।

14 दिसंबर 2017 को बेटे का जन्म हुआ
– इस बीच 14 दिसम्बर को हरस्वरूप की पत्नी संजू ने तीसरे बेटे को जन्म दिया। इस दंपती को मदद की उम्मीद थी, न ही पति के हालत सुधरने की आस। मां ने अपने इस कलेजे के टुकड़े को 42 हजार रुपए में अपने से जुदा कर दिया, ताकि बीमार पति हरस्वरूप का इलाज करा सके।

– महिला का कहना है कि बेटे को बेचने के अलावा हमारे पास कोई और रास्ता उसके पास नहीं था। हमारे पास पैसे आए, इसलिए हमने बेटे को बेच दिया। पति के इलाज के लिए पैसे नहीं थे।

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