कोलकाता, मुंबई, नोएडा और हैदराबाद में चार सरकारी टकसालों में सिक्के बनाने का काम रोक दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इनके भंडारण के लिए जगह की कमी और बाजार में सिक्कों की ज्यादा भरमार को देखते हुए यह कदम रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया उठाया पड़ा है। इन टकसालों को चलाने वाली सरकारी कंपनी सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैें।

रिजर्व बैंक के सूत्रों के अनुसार समय-समय पर यह आकलन करते रहना पडता है कि सिक्कों का प्रसार व भंडारण क्षमता और उत्पादन के बीच कितना संतुलन है। कंपनी के मुताबिक 8 जनवरी 2018 तक सरकारी टकसालों में प्रसार के लिए 252.80 करोड़ सिक्के रखे हुए थे। सिक्के बनाने का काम रोके जाने से टकसाल के कर्मचारी बिल्कुल खुश नहीं हैं क्योंकि इससे उनके भुगतान पर काफी असर पडेगा। कोलकाता की टकसाल में 1,400 कर्मचारी काम करते हैं।

अब तो यूपी में भिखारी भी नहीं ले रहे एक रुपए के छोटे सिक्के

केंद्र सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं है, फिर भी भिखारियों ने एक रुपए के छोटे वाले सिक्के को लेना बंद कर दिया है। ऐसा सिर्फ रामपुर में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों और शहरों में भी हो रही है ये प्रकिया । नवंबर 2016 में पांच सौ और एक हजार रुपए की बंदी के बाद बाजार में सिक्कों की बहुतायत हो गई। इससे व्यवहारिक दिक्कतें आने लगीं। ग्राहक और दुकानदार भी सिक्के नहीं ले रहे। इन सिक्कों को दुकानदार यदि बैंक में जमा करने जाएं तो वहां भी नहीं लिए जा रहे। अब भिखारी भी एक रुपए के सिक्के नहीं ले रहे। रेलवे स्टेशन के पास भीख मांग रहे गंगाराम ने कहा कि आज के दौर में एक रुपए में कुछ नहीं मिलता। पहले सिक्के इकट्ठा करके दुकानदारों को दे देते थे, लेकिन अब वह भी नहीं ले रहे। जब कुछ मिलता नहीं और दुकानदार इसे लेते नहीं तो हम क्यों लें। इसी तरह बस अड्डे पर भीख मांग रहे अब्दुल ने कहा कि कई बार सिक्का न लेने पर लोग बुरा भला कह जाते हैं।

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